भारत मौसम विज्ञान केन्द्र

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श्रीनगर, शिमला, देहरादून में 24 घंटों के बाद शुष्क मौसम; पर्यटन के लिए बेहतरीन समय
उत्तर भारत में सुंदर वादियों के लिए मशहूर और देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करने वाले जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पर्यटकों की संख्या फिर से बढ़ने वाली है। यूं तो लोग गर्मियों में मैदानी भागों से शीतल मौसम का आनंद लेने पहाड़ों पर जाते हैं लेकिन सर्दियों में बर्फबारी का नज़र भी बड़ी संख्या में पर्यटकों को खींचता है। भले ही बर्फबारी का रोमांच अभी दूर है लेकिन खुशनुमा मौसम आपको बुला रहा है।
सितंबर महीने की शुरुआत हो गई है और ऐसे में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी करने का समय आ गया है। साथ ही पहाड़ों पर बारिश देना वाले पश्चिमी विक्षोभ भी अब जम्मू कश्मीर से काफी उत्तर से निकलेंगे जिसके चलते पर्वतीय भागों में बारिश में व्यापक कमी आएगी।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों में अब भारी बारिश की संभावना नहीं है। बारिश में कमी से भूस्खलन जैसी दुर्घटनाएँ भी होने की आशंका कम हो जाती है। कह सकते हैं कि पर्यटन के लिए अनुकूल मौसम अब शुरू हो गया है।
फिलहाल राजस्थान के उत्तर-पूर्वी भागों पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। इसके अलावा उत्तर भारत में मॉनसून की अक्षीय रेखा सक्रिय है। पर्वतीय राज्यों में दक्षिण-पूर्वी आर्द्र हवाएँ चल रही हैं। इसके चलते अगले 24 घंटों तक दक्षिणी जम्मू कश्मीर में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। जबकि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में इस दौरान हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। तीनों राज्यों में 24 घंटों के बाद बारिश बंद हो जाएगी।
कश्मीर में श्रीनगर से लेकर, हिमाचल में धर्मशाला, कुल्लू, मनाली, शिमला और उत्तराखंड में ऋषिकेश, हरिद्वार, देहारादून और नैनीताल का रुख आप अब बिना किसी चिंता के कर सकते हैं। हालांकि इन भागों में 10 सितंबर को एक बार फिर से कुछ समय के लिए मौसम के करवट लेने की संभावना है। लेकिन उस दौरान भी भारी बारिश नहीं होगी और बारिश का मौसम 24 से 48 घंटों तक ही सीमित रहेगा।
इस बीच अगले 24  घंटों के बाद राजस्थान पर एक एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन सकता है। इसके चलते मॉनसून ट्रफ कमजोर होगी और उत्तर भारत के मैदानी भागों में पहुँच रही आर्द्र दक्षिण-पूर्वी हवाएँ बंद हो जाएंगी और उत्तर-पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बढ़ जाएगा। यह हवाएँ शुष्क होंगी जिससे तीनों पर्वतीय राज्यों में मौसम व्यापक रूप में साफ और शुष्क होने की संभावना है।

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