मध्य प्रदेश में बारिश न होने की बजे यह है

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मप्र में झमाझम बारिश न होने के पीछे का है यह रहस्य, मानसून में आ गया है ट्रब्स, जानिए क्या है ये
द्रोणिका की दगा के बाद अब ट्रब्स ने मानसून सिस्टम किया बायपास, पश्चिम मध्यप्रदेश को झमाझम से किया वंचित
इंदौर.पश्चिमी मप्र में बूंदाबांदी ने धरती की परत को गीला तो किया लेकिन पूरे अंचल को झमाझम का इंतजार है। इंदौर में बारिश का आंकड़ा 21 इंच के आसपास तक ही पहुंच पाया है। जानकारों का कहना है, जून-जुलाई में बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम द्रोणिका की दगाबाजी से बारिश को तरसा गए। अब मानसूनब्रेक के कारण बने मानसूनट्रब्स की स्थिति में सिस्टम शिफ्ट हो गया। मानसूनका ट्रैक ओडिशा, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र होते हुए गुजरात चला गया है। इसका आंशिक असर पश्चिमी मप्र के कुछ हिस्सों में नजर आ रहा है। मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है, अभी उम्मीद टूटी नहीं है।
नदी-नाले प्यासे
शहर ही नहीं पूरे पश्चिम मप्र को तेज बारिश का इंतजार है। आमतौर पर इन दिनों में एक दो मर्तबा कुछ ही घंटों में 2 से 3 इंच तक बारिश होती है। इस बार आधे से अधिक मानसूनसत्र बीत गया, एेसी स्थिति कम ही बनी। अब तक देखें तो 520 मिली यानी 21 इंच के आसपास पानी बरसा है, लेकिन सभी जल स्रोतों में पानी नहीं भरा है।
तापमान से फायदा
21 इंच बारिश के बाद भी वर्तमान में ठंडक का एहसास नहीं हो रहा है। गर्मी-उमस की स्थिति बनी हुई है। तापमान सामान्य से अधिक है। यह स्थिति आने वाले दिनों में बनने वाले सिस्टम के लिए अच्छी हो सकती है। इससे तेज बारिश की संभावना अगस्त के आखिरी सप्ताह तक बनी रहेगी।
द्रोणिका :द्रोणिका एक रेखा होती है, जो बंगाल की खाड़ी से राजस्थान के बीच बनती है। प्रारंभिक मानसूनइसी द्रोणिका के आस पास रहते हुए बरसता है।
मानसूनट्रब्स :देश में प्रारंभिक मानसूनके बाद मानसूनब्रेक की स्थिति बनती है। इसमें पानी ऊपर की ओर उत्तर-पूर्व में चला जाता है। बारिश होने वाले इलाकों में तापमान अधिक होने से मानसूनट्रब्स की स्थिति बनती है जिससे दोबारा बनने वाले बारिश के सिस्टम से नीचे की ओर बारिश होती है।
बारिश और तापमान
रविवार तक : 21 इंच
तापमान : अधिकतम - 31.6 (+4)
न्यूनतम - 22
इसलिए नहीं बन रही झमाझम की स्थिति
सामान्य तौर पर जून-जुलाई में बारिश के बाद मप्र में मानसूनब्रेक की स्थिति बनती है। इस समय अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी आना कम हो जाती है। बारिश के सिस्टम कमजोर हो जाते हैं। यह स्थिति चार दिन या हफ्तेभर तक रहती है। एेसी स्थितियों में पानी उत्तर-पूर्वी इलाके में खूब बरसता है। कभी-कभी हिमालय की तराई और इससे भी आगे बारिश निकल जाती है। इससे बिहार-असम, उप्र में बाढ़ की स्थिति बनती है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। मानसूनट्रब्स से सिस्टम शिफ्ट हो गया। वर्तमान सिस्टम ओडिशा के ऊपर बना और आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र के रास्ते से गुजरात की ओर निकल गया। पश्चिम मप्र को बायपास कर दिया। पिछले एक सप्ताह से बारिश तो हो रही है, लेकिन रिमझिम से ही संतोष करना पड़ रहा है। तेज या झमाझम बारिश की स्थिति नहीं बन सकी है। क्षेत्र का तापमान अधिक होने से हवाओं का रुख नमी ला रहा है। पानी इतना बरस रहा है कि मौसम मानसूनी बना रहे और फसल की प्यास बुझ जाए।

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