एसी कल्चर में घर से बाहर नहीं निकल रही 'मादा मच्छर'
Publish Date:Mon, 20 Aug 2018 05:28 AM (IST)

आगरा : गर्मी में एसी (वातानुकूलित) और कूलर कल्चर से 'मादा मच्छर' घर से बाहर नहीं निकल रही हैं। इनके आकार, प्रजनन और व्यवहार में भी बदलाव आया है। अब मच्छर नजर में नहीं आ रहे हैं, ये घर में छिपकर बैठे रहते हैं। काटने के बाद मच्छर के उड़ने पर अहसास होता है। सोमवार को विश्व मच्छर दिवस है। मच्छरों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है।
अधिक गर्मी और सर्दी में मच्छर खत्म हो जाते हैं। मगर, अब ऐसा नहीं है। गर्मी में घरों में एसी और कूलर कल्चर का माहौल मच्छरों की प्रजनन क्षमता को बढ़ा रहा है। सेंट जोंस कॉलेज के जीव विज्ञान विभाग के अध्यक्ष व कीट विज्ञानी डॉ. गिरीश माहेश्वरी ने बताया 24 से 32 डिग्री तापमान में मादा मच्छर नर मच्छर से मैट (अंडा फर्टिलाइज होना) करती थी। एसी और कूलर से जून से लेकर अक्टूबर तक घर के अंदर का तापमान 28 से 30 डिग्री तक रहने लगा है। इस दौरान सबसे ज्यादा मच्छर पैदा हो रहे हैं, मादा मच्छर द्वारा पानी में दिए गए अंडे 15 से 16 दिन में वयस्क हो जाते हैं। इसके बाद यह काटना शुरू कर देते हैं। पिछले कुछ सालों में देखने को मिल रहा है कि मादा मच्छर घर से बाहर नहीं निकलती है। डेंगू फैलने वाली मादा एडीज एजिप्टी साफ पानी में अंडे देते हैं। इसके लिए प्रोटीन की जरूरत होती है। यह मनुष्य के खून से मिलता है। घरों में साफ पानी भी मिल रहा है। अनुकूल माहौल मिलने पर मादा एडीज एजिप्टी 24 घंटे में एक की जगह तीन से चार नर एडीज एजिस्टी से मैट कर रही है। इससे वह 100 से 150 अंडे दे रही है।
कोइल नहीं कर रही काम, छिपकर काट रहे मच्छर:
मच्छर को मारने के लिए कोइल और नेट का इस्तेमाल होने लगा है, इसके बाद से यह कम उड़ता है। इसका आकार छोटा होता है और पतंगे की तरह है, इसलिए बेड, कुर्सी के नीचे छिप जाता है। धीरे धीरे लोगों के शरीर पर पहुंचता है, इसके बाद खून पीने लगता है। इससे कुछ देर में लोगों को पता चलता है कि मच्छर बैठा हुआ है, जब तक वह चला जाता है। जिला मलेरिया अधिकारी आरके दीक्षित ने बताया कि मच्छरों ने भी बदलाव किया है। उन पर कोइल का असर नहीं पड़ रहा है। इनसे बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग कर सकते हैं, कोइल की ब्रांड भी बदलते रहें। साथ ही कूलर और गमलों में कई दिनों तक पानी ना भरा रहने दें।
मच्छर की लाइफ:
यह अंडा चार से छह दिन में लार्वा, इसके बाद प्यूपा और 15 से 16 दिन में वयस्क बन रहा है। इसके बाद 20 से 25 दिन तक जिंदा रहता है।
कूलर में 100 लार्वा, घर के बाहर जलभराव में लार्वा कम:
सेंट जोंस कॉलेज में कराई गई स्टडी में घर में लगे कूलर, गमलों के पानी और घर के अंदर से एडीज एजिप्टी के लार्वा और एडल्ट मच्छर कलेक्ट किए थे। कूलर से 80 से 100 तक लार्वा मिले थे, जबकि घर के अंदर से 15 से 20 वयस्क कलेक्ट किए गए। वहीं, घर के बाहर लंबे समय से जलभराव होने पर ही मच्छर मिल रहे हैं। जयपुर हाउस में सबसे ज्यादा डेंगू फैलाने वाला मच्छर:
एडीज एजिप्टी से डेंगू फैलता है। पिछले साल सेंट जोंस कॉलेज द्वारा शहर के अलग अलग हिस्सों से एडीज एजिप्टी की संख्या का आकलन किया था। इसमें सबसे ज्यादा संख्या जयपुर हाउस, अशोक नगर, कमला नगर, दयालबाग, एसएन मेडिकल कॉलेज में मिली थी। यह गंदे पानी में नहीं पनपता है, इसलिए एडीज एजिप्टी की संख्या बल्केश्वर, यमुना पार सहित शहर की मलिन बस्ती में बहुत कम मिली।

