स्वास्थ्य विभाग फिर सामने आया घोटाला, जानें पूरा मामला

अनियमितता: दस्तक अभियान का मामला, बजट देखकर टपक रही अधिकारियों की लार
छिंदवाड़ा. दस्तक अभियान के प्रचार-प्रसार की राशि में कमीशनबाजी को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मीडिया अधिकारी द्वारा शासकीय प्रिटिंग प्रेस में पॉम्पलेट छपाने के दावे को विभागीय अधिकारियों ने ही झूठा साबित कर दिया है। इसके लिए एक निजी फर्म को दिए गए छपाई के कार्य आदेश की प्रतियां भी ‘पत्रिका’ को मुहैया कराई गई है। इतना ही नहीं जिला अस्पताल की रोगी कल्याण समिति द्वारा अधिकृत एजेंसी से भी किसी प्रकार का कंसल्ट नहीं किया गया है।
शासकीय बताकर निजी प्रिटिंग प्रेस से कराई प्रचार-प्रसार सामग्री की छपाई
शासकीय दर की अपेक्षा अधिकृत एजेंसी की दर अधिक होने की बात कही जा रही है। अब मामला सामने आते ही मीडिया अधिकारी डॉ. प्रमोद वासनिक के सुर भी बदल गए है। उनका कहना है कि प्रचार-प्रसार का दायित्व उनका है, लेकिन विवाद के चलते उन्होंने बीच में ही उक्त कार्य को छोड़ दिया है तथा निजी फर्म को कोटेशन के आधार पर एक लाख चालीस हजार पॉम्पलेट छापने के कार्य आदेश जारी किए हैं।
डॉ. वासनिक का दावा है कि एक लाख तक के किसी भी कार्य के लिए वह कोटेशन के आधार पर कार्य आदेश जारी कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि प्रचार-प्रसार को लेकर उपजे विवाद और कमीशनबाजी को लेकर पत्रिका ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया था।
