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भारत सरकार ने जारी की चेतावनी, 2.8 फीट तक बढ़ सकता है समुद्र स्तर

सरकार ने बताया कि मुंबई और अन्य पश्चिमी तट जैसे खम्बाट, गुजरात का कच्छ, कोंकण के कुछ हिस्से और दक्षिण केरल समुद्र स्तर बढ़ने से सबसे ज्यादा चपेट में आ सकते हैं

Updated On: Dec 22, 2018 11:51 AM IST

FP Staff

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भारत के तटों पर ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से सदी के आखिर तक समुद्र का जल स्तर 3.5 इंच से 34 इंच (2.8 फीट) तक बढ़ सकता है. मुंबई सहित पश्चिमी तट और पूर्वी भारत के प्रमुख डेल्टाओं में यह बड़े खतरे की घंटी हो सकती है. यह जानकारी बीते शुक्रवार को सरकार की तरफ से दी गई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने हैदराबाद स्थित नेशनल सेंटर फॉर ओशियन इन्फॉर्मेशन सर्विस के हवाले से बताया कि मुंबई और अन्य पश्चिमी तट जैसे खम्बाट, गुजरात का कच्छ, कोंकण के कुछ हिस्से और दक्षिण केरल समुद्र स्तर बढ़ने से सबसे ज्यादा चपेट में आ सकते हैं.

भारत की खाद्य सुरक्षा पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा

समुद्र स्तर बढ़ने को इसलिए भी बड़ा खतरा बताया जा रहा है क्योंकि इससे रिवर सिस्टम पूरी तरह गड़बड़ा सकता है. ऐसे में भारत की खाद्य सुरक्षा पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. बता दें कि बीते दिनों प्रोसिडिंग्स ऑफ दि नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेस नाम की पत्रिका की एक स्टडी में बताया गया था कि बीते 25 वर्षों में समुद्र के जलस्तर में बहुत अधिक वृद्धि की वजह केवल प्राकृतिक परिवर्तनशीलता ही नहीं बल्कि कुछ हद तक इंसानी गतिविधियों की वजह से हुआ जलवायु परिवर्तन भी है. इनके मुताबिक विश्व के वह हिस्से जहां समुद्री जलस्तर में औसत से कहीं अधिक वृद्धि हुई है वहां यह चलन जारी रह सकता है और इसकी वजह जलवायु का गर्म होना है.

2050 तक मध्य और दक्षिण भारत भारी मात्रा में पानी का सामना करेगा

इसमें कहा गया है कि बाढ़ जैसी बड़ी आपदाओं के कारण लोगों का जीवन खतरे में आ जाएगा. जहां एक तरफ देश में सिंचाई आदि के लिए पानी की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर इसी साल जारी हुई यूनेस्को की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2050 तक मध्य और दक्षिण भारत भारी मात्रा में पानी का सामना करेगा. इसका मतलब ये है कि बारिश, बाढ़ और सुनामी जैसी आपदाओं के कारण देश में जल स्तर बढ़ेगा. सरकार की ओर से कहा गया है कि पूर्वी तट पर गंगा, कृष्णा, गोदावरी, कावेरी और महानदी के डेल्टाओं को खतरा पैदा हो सकता है, साथ ही सिंचित भूमि और कई शहरी एवं अन्य बस्तियों को भी खतरा होगा जो वहां स्थित हैं.

तटीय भूजल में खारे पानी की मात्रा में अनुमानित वृद्धि हुई है

समुद्र स्तर के बढ़ने से जलवायु परिवर्तन का भारत के तटीय क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़े एक प्रश्न के जवाब में पर्यावरण राज्य मंत्री महेश शर्मा ने लिखित जवाब में कहा, तटीय भूजल में खारे पानी की मात्रा में अनुमानित वृद्धि हुई है. झीलों के लिए खतरा बढ़ा है और बहुमूल्य भूमि पर भी बाढ़ का खतरा बढ़ा है. हालांकि उन्होंने बाद में कहा कि सरकार देश के तटीय क्षेत्रों और समुदायों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने आगे कहा कि इस ओर कदम बढ़ाते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटीज- कोस्टल रेग्युलेशन जोन अधिसूचना 2011 और आइलैंड प्रोटेक्शन जोन अधिसूचना 2011 को लागू और कार्यान्वित कर रहे हैं.

क्षेत्रीय पैटर्न के पीछे एक वजह जलवायु परिवर्तन भी है

इनके तहत कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटीज के पास अधिकार है कि अगर कोई इन कानूनों का उल्लंघन करे तो वह उससे पूछताछ कर सके और कानून के तहत आवश्यक कदम उठाए. तटीय क्षेत्रों पर रहने वालों का जीवन प्रभावित न हो और न ही तटीय पारिस्थितिकी को कोई नुकसान पहुंचे इसका भी ध्यान रखा जा रहा है. अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक रिसर्च के जॉन फसुलो ने कहा था यह जानने के बाद कि इन क्षेत्रीय पैटर्न के पीछे एक वजह जलवायु परिवर्तन भी है, हम यह भरोसे से कह सकते हैं कि ये पैटर्न जारी रहेंगे और अगर भविष्य में जलवायु परिवर्तन लगातार जारी रहता है तो ये पैटर्न और गहरा भी सकते हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक दुनिया के कुछ हिस्सों में स्थानीय समुद्री जलस्तर में वृद्धि औसत के मुकाबले लगभग दोगुनी है.

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