देर से आए मानसून को ‘वायु’ दे सकता है एक और झटका, चक्रवाती तूफान आने से मौसम वैज्ञानिक चिंतित

तकरीबन दस दिन की देरी से चल रहे मानसून पर वायु तूफान का बुरा असर पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार तूफान से कुछ राज्यों में अगले दो-तीन दिन भले ही अच्छी बारिश हो लेकिन इसके दुष्प्रभाव से उत्तर भारत में मानसून का इंतजार बढ़ सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून के दौरान ऐसे चक्रवाती तूफानों का अक्सर नुकसान ही होता है। पूर्व में भी जब बंगाल की खाड़ी से तूफान आया था तो उसके बाद मानसून की प्रगति दस दिन रुक गई थी। हालांकि इस बार तूफान अरब सागर की तरफ से आ रहा है, इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि उतना बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन फिर भी न्यूनतम प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के महानिदेशक डॉक्टर केजे रमेश ने कहा कि इसका मानसून पर कोई अनुकूल या प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना नहीं है। दरअसल, इसके पीछे तर्क यह है कि मानसून अभी केरल और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में है जबकि तूफान गुजरात की तरफ है। यदि यह तूफान केरल और तमिलनाडु के तटों की तरफ से आता तो इससे मानसून को आगे बढ़ने में मदद मिल सकती थी। लेकिन तूफान और मानसून के बीच काफी दूरी है। अलबत्ता तूफान के गुजर जाने के बाद हवाओं की ऊर्जा नष्ट होने के कारण उस क्षेत्र में नया सिस्टम बनने में कई दिन लग सकते हैं। तब तक मानसून जहां का तहां अटका रहा सकता है।
बारिश से फायदा
मौसम विशेषज्ञ डॉक्टर रंजीत सिंह कहते हैं कि तूफान के दौरान, गुजरात और राजस्थान तथा आसपास के इलाकों में दो-तीन दिनों तक अच्छी बारिश हो सकती है। इससे दो फायदे होंगे। एक तो इन क्षेत्रों में बारिश से खेती के लिए फौरी राहत मिलेगी हालांकि इस बारिश के आधार पर बुवाई नहीं की जा सकती है। उसके लिए आगे भी बारिश की जरूरत होती है। दूसरे, राजस्थान की तरफ से आने वाली गर्म हवाओं का प्रकोप कम होगा। तूफान से होने वाली बारिश को मानसूनी बारिश में ही दर्ज किया जाता है। इसलिए बारिश में कमी के मौजूदा आंकड़ों में सुधार नजर आएगा।
