राजनीति नहीं, व्यवस्था का विषय हैं परीक्षाएं

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नीट और जेईई (मेनस) की परीक्षा को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सात गैर-भाजपा वाली राज्य सरकारें कोरोना काल में परीक्षाओं के खिलाफ उतर आई हैं। विरोधी पार्टियां वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मीटिंग भी हुई है। हालातों से ऐसा लग रहा है कि परीक्षा का मामला राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है, जो बेहद चिंताजनक व नाकारत्मक है। नेताओं की हर मामले को राजनीतिक चश्में से देखने की आदत बन गई है। सुप्रीम कोर्ट परिक्षाएं टालने के लिए दायर याचिकाओं को रद्द कर चुका है, जहां तक विद्यार्थियों का सवाल है, 75 प्रतिशत के करीब नीट विद्यार्थी अपना रोल नंबर प्राप्त कर चुके हैं जिससे स्पष्ट है कि विद्यार्थी परीक्षा देने के इच्छुके हैं। दरअसल यह विषय राजनीति का नहीं बल्कि व्यवस्था बनाने का है। परीक्षा को कामयाब बनाने के लिए व्यवस्था व दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है। भले ही देश में कोविड-19 महामारी के कारण मरीजों की गिनती 31 लाख को पार कर गई है लेकिन अधिक प्रभावित राज्यों में एक भी राज्य ऐसा नहीं जहां लॉकडाउन की सभी पाबंदियां जारी हों, काफी पाबंदियां हटा ली गई हैं। सभी राज्य ही आर्थिक गतिविधियों को चालू करने के लिए दुकानें, जिम, होटल, रैस्टोरैंट सहित अन्य आवश्यक कार्य सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत खोलने की अनुमति दे चुके हैं, यहां तक कि बस सेवा भी लगभग हर राज्य में चालू है। कोई भी काम करने के लिए बकायदा सावधानियों का चार्ट तैयार किया जा रहा है तब नीट और जेईई परिक्षाओं पर राजनीतिक उथल-पुथल बिल्कुल बेतुका व हास्यप्रद है। यूं भी परिक्षाओं का विरोध करने वाली कुछ पार्टियां अपने राज्यों की विधान सभा का सत्र एक दिन की बजाए लंबा चलाने की मांग कर रही हैं।
दर्जनों विधायकों को कोरोना होने के बावजूद सत्र बढ़ाने की मांग और परिक्षाओं का विरोध दोहरे मापदंड का परिणाम हैं। करोड़ों प्रवासी मजदूरों की वापिसी कोरोना काल में ट्रेनों/बसों के द्वारा हुई। उस वक्त भी विरोधी पार्टियों ने मजदूरों की वापिसी के लिए बसें मुहैया करवाई थी। परिक्षाओं का मसला तो केवल एक दिन का ही है। विद्यार्थियों की गिनती करोड़ का तीसरा हिस्सा भी नहीं है। यूं भी देखा जाए तब आजकल बाजारों में काफी रौणक है। देश में 70-80 करोड़ के करीब लोग रोजाना अपने काम-धंधों के लिए घरों से निकलते हैं। परीक्षा करवाना अन्य कार्यों की तरह ही एक टास्क है जिसे संक्रमण रहित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रोटोकॉल को लागू करने के लिए प्रबंध करना चाहिए। इतने बड़े तंत्र में परीक्षा न हुई तब यह देश की कमजोरी ही साबित होगा। परीक्षा करवाना, उन लाखों विद्यार्थियों के साथ न्याय करना है जिन्होंने पूरी मेहनत, लगन और महंगी कोचिंग लेकर तैयारी की है।

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