शौचालय गिरने का भय,खुले में जा रहे शौच

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शौचालय गिरने का भय,खुले में जा रहे शौच

Publish Date:Fri, 24 Aug 2018 07:25 PM (IST)संवाद सहयोगी, चकरनगर : विकास खंड की ग्राम पंचायत छिवरौली के गांव कांयछी में शौचालय गिरन...

संवाद सहयोगी, चकरनगर : विकास खंड की ग्राम पंचायत छिवरौली के गांव कांयछी में शौचालय गिरने के भय से लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। कुछ शौचालयों के गड्ढे अभी पाटे नहीं गए हैं। निर्माणाधीन इंटरलॉ¨कग ईंट से लेकर शौचालय और नाली निर्माण कार्यों में यमुना काी बालू धड़ल्ले से लगाई जा रही है। निर्माण कार्यों में सीमेंट का दिखावा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रधान पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से ग्राम पंचायत के कार्यों की जांच की मांग की है।

विकास खंड चकरनगर की ग्राम पंचायतों में प्रधान और सचिवों द्वारा इस कदर मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिसका जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है। इसकी बानगी कांयछी गांव में मिलती है। पानी निकासी के लिए बनाई जा रही नाली में तीसरे दर्जे की भूसा से पकी पीली ईंट का प्रयोग किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में बनाए गए शौचालयों के गड्ढों में सिर्फ ईंट का घेरा बना दिया गया है। जिसमें सीमेंट तो दूर, बालू भी नहीं लगाई गई है। पड़ताल में मौके पर एक गड्ढे में कुत्ता पाया गया। यमुना नदी की बालू लगाकर बनाए गए शौचालयों में सीमेंट नाम मात्र का मिलाया गया है, इससे शौचालय कभी भी भरभराने की आशंका रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि खुले में शौच जाना मजबूरी है क्योंकि शौचालय गुणवत्ता को ताक पर रखकर बनाए गए हैं। ग्राम प्रधान रविन्द्र कुमार ातर्क देते हैं कि ईंट तीसरे नहीं दोयम दर्जे की है। बालू ग्रामीणों ने ही यमुना नदी से लाकर दी है। सीमेंट उचित मात्रा में मिलाया जा रहा है। जब प्रधान को बिना सीमेंट के गड्ढे दिखाए गए तो तो सारा दोष राजमिस्त्री पर मढ़ दिया। खंड विकास अधिकारी प्रमोद कुमार ने कहा कि जेई को मौके पर भेजकर जांच कराएंगे। यदि काम गलत हो रहा है तो उसमें सुधार कराया जाएगा। पूर्व माध्यमिक विद्यालय शौचालय विहीन

कांयछी में संचालित परिषदीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक मनोज कुमार ने बताया कि विद्यालय में न शौचालय है और न ही टॉयलेट। बच्चे परेशान रहते हैं। कई बार संबंधित अधिकारियों को भी अवगत कराया गया, प्रधान से अनुरोध किया लेकिन कोई नहीं सुनता। ऐसी स्थिति में कोई अप्रिय घटना घटती है तो सभी शिक्षकों पर हावी हो जाते हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि विद्यालय में शौचालय के लिए बजट नहीं है।

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