*_हम पत्रकारों की कविता_*
_इसमे गल्तियां हो तो छमा करे_
सुना है कि अब मैं पत्रकार हो गया हूं
*_ना समझ था पहले लगता है अब में समझदार हो गया हूं_।*
*बहुत गुस्सा था इस व्यवस्था के खिलाफ*
*अब उसी का भागीदार हो गया हूं*
*दिल पसीजता था राह चलते हुए पहले*
*कलम हाथ में आते ही दिमागदार हो गया हूं।*
*लगता है अब में समझदार हो गया हूँ*
*सुना है में पत्रकार हो गया हूँ*
*कभी नफरत थी कुछ छपी हुई खबरों से मुझे*
*आज उन्हीं खबरों का तलबगार हो गया हूं।*
*सोचा था अलग राह पकडूंगा बकील बनकर*
*अब मैं भी भेड़ चाल में शुमार हो गया हूं।*
*सोचा था लाखो कमाएंगे बकील बनकर*
*लेकिन हद से ज्यादा कानून का उल्लघन देख कर गरीबो का हमदर्द हो गया हूँ*
*कलम से लिखकर बदलने चला था दुनिया को मैं*
*पर गरीबो की कमजोरी ओर बड़े लोगो देख खुद बदल गया हूं में।*
*लगता है में समझ दार हो गया हूँ*
*_सुना है में पत्रकार हो गया हूँ_*
*हमे दिख रही है देश की तरक्की सारी😂*
*क्योंकि अब मैं नेताओं का यार हो गया हूं।*
*इंकबाल वंदे मातरम कई नारे आते हैं मुझे*
*पर क्या करूं विज्ञापनों के कारण लाचार हो गया हूं।*
*ढूंढता था पहले देश की बेहाली के जिम्मेदारों को*
*समझ गया हूं सब कुछ,*
*लगता है अब मैं समझदार हो गया हूं,*
*सुना है में पत्रकार हो गया हूँ
✍️adv. राज भाई 9457361400
